
प्रेमानंद जी महाराज कौन हैं?
Premanand Ji Maharaj Net Worth : प्रेमानंद जी महाराज एक प्रसिद्ध भारतीय संत, प्रवचनकर्ता और आध्यात्मिक गुरु हैं, जिनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। वे उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अकरी गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। महाराज जी का संबंध राधावल्लभ संप्रदाय से है और उनकी शिक्षाओं में प्रेम, भक्ति और आत्मिक ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
उनकी वाणी में इतनी मिठास और गहराई होती है कि लाखों लोग उनके प्रवचनों को सुनकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। वे आज के समय के सबसे लोकप्रिय संतों में से एक हैं, जिनकी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों उपस्थिति अत्यंत प्रभावशाली है।
🚨 यह सिर्फ़ अफवाह है!
सोशल मीडिया पर प्रेमानंद जी महाराज के निधन की जो खबरें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से असत्य और भ्रामक हैं।
- आश्रम ने साफ कहा है कि वे जीवित हैं और उनका इलाज जारी है।
- उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनकी किडनी फेल हो गई है, लेकिन वे स्थिर हैं।
- उनकी मृत्यु की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कृपया अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लें।
Premanand ji Maharaj Health Update
महाराज जी बीते दो दशकों से पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी दोनों किडनियाँ ठीक से काम नहीं कर रही हैं और वे लगभग 20 सालों से डायलिसिस पर निर्भर हैं।
इसी कारण वे कई बार लंबे प्रवचन या यात्राएँ नहीं कर पाते, परंतु उनके भक्तों के लिए राहत की बात यह है कि हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में महाराज जी मुस्कुराते हुए नज़र आए — जिससे भक्तों में अपार खुशी और आशा का संचार हुआ।
आध्यात्मिक पहचान और प्रवचन शैली
प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन प्रेम, भक्ति, करुणा और मानवता पर केंद्रित रहते हैं। वे श्री राधा-रमण भगवान की भक्ति और प्रेम रस के माध्यम से जीवन के गूढ़ प्रश्नों के सरल समाधान बताते हैं।
उनके यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम पेज पर नियमित रूप से लाइव सत्संग, भजन और भक्ति मार्ग पर प्रश्नोत्तर सत्र प्रसारित किए जाते हैं। लाखों भक्त इन सत्रों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में शांति और समर्पण का भाव अपनाते हैं।
व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक परंपरा
महाराज जी के दादा भी संन्यासी थे और उन्होंने परिवार से ही आध्यात्मिक विरासत प्राप्त की। प्रारंभिक जीवन में ही उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग कर भक्ति मार्ग को चुना। वे साधारण जीवन जीते हैं, भव्यता से नहीं, बल्कि सेवा से पहचान बनाते हैं।
संपत्ति, आय के स्रोत और नेट वर्थ का सच
कई इंटरनेशनल वेबसाइट्स प्रेमानंद जी महाराज की Net Worth $1 मिलियन (लगभग ₹8 करोड़) बताती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वह धन उनकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है।
वे स्वयं स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उनके पास अपने नाम पर कोई बैंक खाता, जमीन, कार, घर या व्यावसायिक संपत्ति नहीं है। वे पूर्णतः संन्यासी जीवन जीते हैं और जो भी व्यवस्थाएँ होती हैं — जैसे इलाज, यात्रा या भोजन — सब उनके भक्तों द्वारा की जाती हैं।
वृंदावन में उनका प्रसिद्ध आश्रम “श्री हित राधा केलि कुंज” के नाम से जाना जाता है। इसकी जमीन की कीमत करोड़ों में हो सकती है, लेकिन यह भी ट्रस्ट और भक्तों के नाम पर है, न कि उनके व्यक्तिगत स्वामित्व में।
इसलिए 2025 में भी Premanand Ji Maharaj की व्यक्तिगत नेट वर्थ = ₹0 मानी जाती है। वे भौतिक संपत्ति से दूर रहकर केवल भक्ति और प्रेम का प्रसार करते हैं।
सामाजिक और डिजिटल उपस्थिति
आज के युग में प्रेमानंद जी महाराज की डिजिटल उपस्थिति भी अत्यंत मजबूत है। उनके YouTube चैनल और Instagram अकाउंट पर लाखों फॉलोअर्स हैं। यहां पर उनके भजन, कथा, और प्रेरणादायक वीडियो नियमित रूप से अपलोड किए जाते हैं।
यदि आप उनके स्वास्थ्य या आगामी प्रवचन के बारे में आधिकारिक अपडेट चाहते हैं, तो Bhajan Marg Official यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें।

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FAQ: प्रेमानंद जी महाराज के बारे में सामान्य प्रश्न
1. प्रेमानंद जी महाराज का असली नाम क्या है?
उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है।
2. क्या प्रेमानंद जी महाराज की कोई संपत्ति है?
नहीं, वे पूर्णतः संन्यासी जीवन जीते हैं और उनके नाम पर कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है।
3. प्रेमानंद जी महाराज की बीमारी क्या है?
वे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) से जूझ रहे हैं और लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर हैं।
4. प्रेमानंद जी महाराज का आश्रम कहाँ है?
उनका मुख्य आश्रम श्री हित राधा केलि कुंज, वृंदावन (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।
5. प्रेमानंद जी महाराज की नेट वर्थ क्या है?
उनकी व्यक्तिगत नेट वर्थ शून्य है; वे सांसारिक धन या संपत्ति से दूर रहते हैं।
निष्कर्ष
Premanand Ji Maharaj आज की दुनिया में भक्ति, विनम्रता और प्रेम का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने कभी भी भौतिक संपत्ति को महत्व नहीं दिया — बल्कि अपने जीवन को पूरी तरह राधा-कृष्ण भक्ति के लिए समर्पित किया है।
उनका जीवन संदेश यही है कि “भक्ति ही सबसे बड़ी संपत्ति है।”

